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कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के दौरान 2005 में पारित महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत लागू ग्रामीण रोजगार योजना 1 जुलाई से समाप्त हो जाएगी। केंद्र सरकार ने सोमवार (11 मई 2026) को अधिसूचना जारी कर कहा कि इस कानून के तहत बनाए गए सभी “नियम, अधिसूचनाएं, योजनाएं, आदेश और दिशानिर्देश” निरस्त माने जाएंगे और उनकी जगह “विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन” (VB-G RAM G) लागू होगा।

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने कहा कि यह कदम मजदूरों के जीवन में “एक नए युग की शुरुआत” है। उन्होंने दावा किया कि यह योजना “विकसित भारत” के लक्ष्य को हासिल करने में मील का पत्थर साबित होगी।

राज्यों से परामर्श जारी

मंत्री ने कहा कि नए कानून के नियम राज्यों से परामर्श के बाद तैयार किए जा रहे हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस संक्रमण काल में किसी भी मजदूर को रोजगार से वंचित नहीं किया जाएगा। अधिकांश राज्यों को नई व्यवस्था लागू करने के लिए अधिकतम छह महीने का समय दिया जाएगा।

मनरेगा यूपीए सरकार द्वारा लागू की गई प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं में से एक थी। नई योजना कई मौजूदा व्यवस्थाओं को बदल देगी, खासकर मांग-आधारित रोजगार प्रणाली को, जिसमें काम की मांग के अनुसार बजट बढ़ाया जाता था।

हालांकि सरकार ने अक्सर पूछे जाने वाले सवालों (FAQ) जारी किए हैं, लेकिन कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर अभी स्पष्टता नहीं दी गई है। इनमें राज्यों को मिलने वाले बजट का निर्धारण करने वाला फॉर्मूला भी शामिल है। मनरेगा में मजदूरी का 100% खर्च केंद्र सरकार वहन करती थी, जबकि नई योजना में अधिकांश राज्यों के लिए खर्च केंद्र और राज्य के बीच 60:40 के अनुपात में बांटा जाएगा।

संसद में पिछले वर्ष पारित हुआ कानून

VB-G RAM G कानून पिछले वर्ष दिसंबर में संसद से पारित हुआ था। इसे बिना पूर्व-विधायी सार्वजनिक परामर्श के मंजूरी दी गई थी। इसके बाद सरकार राज्यों के ग्रामीण विकास विभागों के साथ साप्ताहिक बैठकें कर रही है ताकि नई व्यवस्था के लिए आवश्यक ढांचा तैयार किया जा सके।

नई योजना में रोजगार गारंटी 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन प्रति वित्तीय वर्ष कर दी गई है।

जॉब कार्ड और ई-केवाईसी

सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन मौजूदा जॉब कार्डधारकों का ई-केवाईसी सत्यापित है, उनके कार्ड तब तक मान्य रहेंगे जब तक नए “ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड” जारी नहीं हो जाते।

कार्यकर्ताओं और शिक्षाविदों के संगठन LibTech के एक अध्ययन के अनुसार, 7 मई 2026 तक 11.58 करोड़ पंजीकृत श्रमिक (45.4%) और 0.95 करोड़ सक्रिय श्रमिक (9.5%) ने अभी तक ई-केवाईसी पूरा नहीं किया है। सरकार ने कहा कि केवल ई-केवाईसी लंबित होने के कारण किसी मजदूर को काम से वंचित नहीं किया जाएगा और इसके लिए कार्यस्थलों पर भी सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

सरकार ने यह भी कहा कि मजदूर मौखिक रूप से, लिखित आवेदन (फॉर्म-6) के जरिए या डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से रोजगार की मांग कर सकेंगे। मनरेगा की तरह काम न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता जारी रहेगा। उपस्थिति दर्ज करने के लिए नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम (NMMS) का उपयोग जारी रहेगा, हालांकि कमजोर इंटरनेट वाले क्षेत्रों में इस डिजिटल व्यवस्था को लेकर चिंता जताई गई है।

60 दिन का “ब्लैकआउट पीरियड”

नए कानून में राज्यों को 60 दिनों तक का “ब्लैकआउट पीरियड” घोषित करने का अधिकार दिया गया है। इसका उद्देश्य बुवाई और कटाई के मौसम में कृषि श्रमिकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना बताया गया है। हालांकि आलोचकों का कहना है कि इससे ग्रामीण मजदूरों की सौदेबाजी की ताकत कमजोर होगी।

कांग्रेस की प्रतिक्रिया

कांग्रेस नेता और पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री Jairam Ramesh ने कहा कि सरकार की घोषणा में “कुछ भी नया नहीं” है। उन्होंने कहा कि यदि यह नई योजना 1 जुलाई 2026 से लागू होनी है, तो इसके सभी परिचालन विवरण अब तक सार्वजनिक हो जाने चाहिए थे।

उन्होंने आरोप लगाया कि VB-G RAM G ग्रामीण मजदूरों की सौदेबाजी की ताकत कमजोर करने और अत्यधिक केंद्रीकरण को बढ़ावा देने वाली योजना है। उनके अनुसार, “ग्रामीण भारत के परिवारों के काम और मजदूरी के संवैधानिक अधिकार छीने जा रहे हैं।”

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