VB-GRAMG Yojana से बनेगा ‘विकसित भारत’ का आधार: ग्रामीण रोजगार को नई दिशा

गुजरात में VB-GRAMG योजना पर चर्चा: 125 दिनों के रोजगार की गारंटी और स्थायी विकास पर जोर

गांधीनगर में आयोजित विधानसभा सत्र के दौरान ‘विकसित भारत – रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ यानी VB-GRAMG Yojana को लेकर व्यापक चर्चा हुई। इस योजना को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली, जहां एक ओर सरकार ने इसे ग्रामीण विकास की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया, वहीं विपक्ष ने इसके क्रियान्वयन और पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए।

राज्य के मंत्री ऋषिकेश पटेल ने गैर-सरकारी प्रस्ताव पर बोलते हुए कहा कि VB-GRAMG योजना देश को विकसित भारत बनाने की दिशा में मजबूत आधार तैयार करेगी। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों को सालाना कम से कम 125 दिनों का रोजगार सुनिश्चित किया जाएगा। यह कदम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और बेरोजगारी को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

पटेल ने यह भी स्पष्ट किया कि यह योजना केवल मजदूरी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से गांवों में स्थायी और टिकाऊ परिसंपत्तियों का निर्माण भी किया जाएगा। इनमें पक्की सड़कें, अमृत सरोवर, आंगनवाड़ी केंद्र, पंचायत भवन और चेक डैम जैसे विकास कार्य शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं से गांवों की आधारभूत संरचना में सुधार होगा और ग्रामीण जीवन स्तर में उल्लेखनीय बदलाव आएगा।

वहीं, इस प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक जिग्नेश मेवाणी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा सरकार ने मनरेगा (MNREGA) योजना का नाम बदलकर VB-GRAMG कर दिया है। उन्होंने कहा कि केवल नाम बदलने से योजना की वास्तविक स्थिति में सुधार नहीं होगा।

मेवाणी ने मांग की कि गुजरात को देश में उदाहरण पेश करते हुए इस योजना के तहत मजदूरी दर को ₹250 से बढ़ाकर ₹400 प्रति दिन करना चाहिए, ताकि श्रमिकों को बेहतर आर्थिक सहयोग मिल सके। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य के कुछ जिलों में मनरेगा से जुड़े कार्यों में हाल के महीनों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आई हैं।

उन्होंने कहा, “कांग्रेस पार्टी इन मामलों की निष्पक्ष जांच के लिए CBI जांच की मांग करती है, ताकि दोषियों को सजा मिल सके और भविष्य में इस तरह की गड़बड़ियों को रोका जा सके।”

इस पूरी बहस के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि VB-GRAMG योजना को लेकर सरकार और विपक्ष दोनों की अपनी-अपनी चिंताएं और दृष्टिकोण हैं। जहां सरकार इसे ग्रामीण विकास और रोजगार सृजन का मजबूत माध्यम मान रही है, वहीं विपक्ष इसकी पारदर्शिता और लाभार्थियों के हितों को लेकर सतर्कता बरतने की मांग कर रहा है।

आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह योजना वास्तव में कितनी प्रभावी साबित होती है और क्या यह ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने में मदद कर पाएगी।

Source: Times Of India

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